Saturday, 6 June 2020


अयोध्या में खुदाई के दौरान निकले भगवान बुद्ध के कई मूर्तियाँ ,  आज का अयोध्या नगर प्राचीन भारत का  'बुद्ध विहार ' था जो साकेत के नाम से जाना जाता था :












    रावण की नगरी श्रीलंका मे बलात्कार      3.4% हैं     और राम की नगरी भारत में 69.5%      हैं      लोग रावण को खामखा बदनाम                 करते हैं.
         गजब का राम मंदिर था..राम की एक भी मूर्ति नहीं मिल रही !जितने भी मिल रहे है सब बुद्ध के ही अवशेष मिल रहे हैं !


           राम नाम की लूट है लूट सके तो लूटइन लूट मचाने वालों की अयोध्या में पकड़ी गई  है बहुत बड़ी झूठ,जानिए कैसे ?

   सच और झूठ में सबसे बड़ा अंतर यही होता है कि समय लग सकता है लेकिन एक दिन सच जरूर  सामने आ ही जाता है और झूठ के पाँव नहीं होते हैं  इसलिए वह बहुत देर तक चल नहीं सकता है और आखिर में झूठ पकड़ी जाती है।


 बात अयोध्या की चल रही है जिसे बौद्ध इतिहास में साकेत के नाम से जाना जाता है जो कि वहाँ बौद्धों का बहुत बड़ा व्यापारिक केंद्र हुआ करता था  उस स्थान पर एक काल्पनिक पात्र राम को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को राज्यसभा सांसद का लालच देकर राम को ऐतिहासिक पुरूष बनवाया गया है भारत में राम के बारे में सदियों से झूठ फैलाया गया था  कि वह अयोध्या नगरी का राजा था 

लेकिन एक अच्छी बात यह है कि दुनिया में झूठ फैलाने वालों के समकक्ष कुछ लोग झूठ को पकड़ने वाले भी मिल ही जाते हैं, अतः राम के बारे में झूठ फैलाने वालों से पूछा गया कि आप कहते हो कि राम अयोध्या में पैदा हुआ था उनके पिता का नाम राजा दशरथ था लेकिन बाल्मीकि रामायण में लिखा हुआ है कि दशरथ संतान पैदा करने में असक्षम था तो फिर उनके घर राम का जन्म कैसे हुआ ?
इसके जवाब में झूठ फैलाने वाले लोगों का कहना है कि श्रींगी ऋषि ने रानियों को प्रसाद खिलाया था उस प्रसाद से राम पैदा हुए थे।


प्रसाद खिलाने से बच्चा पैदा होने की बात से ही साफ हो जाता है कि राम ने कभी भी जन्म लिया बल्कि वह एक काल्पनिक पात्र है क्योंकि दुनिया में आज टेक्नोलॉजी इतनी अधिक एडवांस में पहुंच चुकी है फिर भी प्रसाद खिलाने से बच्चा पैदा होने की  टेक्नोलॉजी झूठ के सौदागरों के अलावा कहीं भी सुनने को नहीं मिलेगी।

 झूठ पकड़ने वाले लोगों ने इन झूठ के सौदागरों से पूछा कि आप लोग राम के जन्म को तो सिद्ध नहीं कर पाये लेकिन कम से कम उनकी पत्नी के जन्म को तो सिद्ध कर दो तो इस पर उनका कहना है किराजा जनक अपने खेत में हल चला रहा था तो जमीन में एक मटकी गड़ी हुई मिली और उस मटकी को खोलकर देखा तो उसमें एक लड़की बैठी हुई थी वह लड़की बाद में सीता के रूप में राम की पत्नी बनी।झूठ पर एक और झूठ बोलने से बिलकुल साफ पता चल जाता है कि राम के साथ साथ सीता भी काल्पनिक थी।


वाह रे झूठ के सौदागरों झूठ बोलने में तो कोई कमी ही नहीं रखी जमीन से पेड़ पौधे तो निकल सकते हैं लेकिन आप लोगों ने सीता को भी जमीन से पैदा कर डाला।
इन झूठ के सौदागरों से एक बात और पूछी गई कि आप लोग राम को अयोध्या का राजा बताते हो लेकिन भारत के इतिहास में जो भी राजा हुए हैं उनके बारे में लिखा हुआ मिलता है कि उसका राज तब से तब तक था इतनी सेना थी अमुक व्यक्ति सेनापति था यह मुद्रा चलती थी ऐसा ध्वज हुआ करता था वह अपना व्यापार बढ़ाने के लिए अमुक राजाओं से मिला था लेकिन राम के बारे में इतिहास के पन्नों पर कहीं कुछ भी नहीं लिखा हुआ है, जब बात इतिहास की आती है तो झूठ के सौदागर मौन हो जाते हैं इसका मतलब वे स्वीकार कर लेते हैं कि राम काल्पनिक पात्र ही था।


झूठ के सौदागरों को अच्छी तरह मालूम था कि काल्पनिक राम को वास्तविक राम के रूप में लाने के लिए जनता को गुमराह करना जरूरी है इसलिए उन लोगों ने कहना शुरू किया कि राम नाम सत्य है, यहां पर भी झूठ पकड़ी गयी है क्योंकि यदि राम वास्तव में होता तो राम नाम सत्य कहने की कोई जरूरत ही नहीं थी जैसे किसी भी व्यक्ति के दो आंखे होती हैं तो वह कभी भी ऐसा प्रचार नहीं करता फिरेगा की यह बात सत्य है कि मेरे दो आंखे हैं।


राम पूरी तरह काल्पनिक थे उन्हें वास्तविक सिद्ध करने के लिए ही इन झूठ के सौदागरों ने सोते उठते बैठते एक दूसरे से मिलते बिछुड़ते, शुभ अवसर पर तो मृत्यु होने पर भी यानी कि हर जगह राम राम बोलने की परंपरा शुरू की साथ ही गाँव से लेकर शहरों तक रामलीला का मंचन करने का अभियान चलाकर लोगों के जहन में बैठाया गया कि राम सच में ही पैदा हुए थे।



राम एक काल्पनिक पात्र था इसे झूठ के सौदागर अच्छी तरह जानते थे लेकिन भारत के मूलनिवासियों को इसका पता ही नहीं चले इसलिए इनके नाम से पहले अथवा बादमे राम जोड़ना जरूरी किया गया किसी का नाम रामरत्न रखा तो किसी को रत्नराम रख दिया साथ ही एक फरमान जारी कर दिया कि हमारे से बिना पूछे कोई भी अपने बच्चों का नाम नहीं रखेगा।एक कहावत है कि एक झूठ को सच में बदलने के लिए एक हजार और झूठ बोलनी पड़ती हैं इन झूठ के सौदागरों ने भी ऐसा ही किया था और अब भी झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे हैं लेकिन मंदिर निर्माण के वक्त भूमि समतलीकरण के दौरान मिले बुद्ध विहार के अवशेषों से एक बार पुनः यह सिद्ध हो गया है कि झूठ के पाँव नहीं होते हैं इसलिए वह ज्यादा नहीं चल सकती है अंत में पकड़ी जाती है।


बौद्धकालीन अवशेष मिलने का मतलब है कि अयोध्या सहित सम्पूर्ण भारत पर तत्कालीन बौद्धों यानि एससी+एसटी+ओबीसी का राज रहा है।
सभी देश वासियों से विनती हैकि अपने देश की दलाल मीडिया को देखना आज से नही,,,अभी से देखना बंद करे,,,अगर वायरस मीडिया बोल रही है   तो,,,तुरंत चैनल बदल ले ,,।।
ऐसा कयों कहा:- आईये समझते है
आप देखना कया चाहते है,,ये ही ना,,कि डाकटरो को हर चीज समय पर मिल रही है या नही,,


कितने लोग भूखे से मर गयकितने लोग सडको पर मर गयकितने लोग पटरियों पर मर गयकितने लोगो को राहत पैसा मिलाकितने गरीब मजदूर अपने घर पहूचे या नही
लेकिन आप लोगो को दिखाते कया है,,पाकिस्तान डर गयाइमरान डर गयाचीन कांप रहा हैपाकिस्तान का भंडा फोडफलाना फलाना,,,,


दलाल मीडिया हमे नही देखने आपके चैनल ,,,हमे दूसरो से कया मतलब ,,,जो हमे दिक्कते आ रही वो दिखाइये

साथियों ये सभी चैनल देखना आज से ही बंद करे!AAJ TAK , ZEE NEWS, ABP NEWS, INDIA TV, 


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